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हिमालय में ‘वॉटर बम’ का खतरा! 200 ग्लेशियल झीलों पर नजर, 25 हाई रिस्क

By admin · August 29, 2026 · Updated August 29, 2026 · 👁 2 Views
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हाल ही में नेपाल में ग्लेशियल झील (Glacial Lake) फटने के कारण आई अचानक बाढ़ की आपदा ने भारत को भी अपनी हिमालयी आपदा प्रबंधन नीतियों और तैयारियों की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर चेतावनी जारी की है कि हिमालयी क्षेत्र में स्थित लगभग 200 ग्लेशियल झीलें अत्यधिक संवेदनशील और खतरनाक स्थिति में हैं, जिनके लिए तत्काल सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।

हिमालयी झीलों से जुड़े खतरे के प्रमुख आंकड़े

  • कुल झीलों की संख्या: सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में लगभग 7,500 ग्लेशियल झीलें मौजूद हैं।
  • गंगा बेसिन में फैलाव: इनमें से करीब 4,700 ग्लेशियल झीलें गंगा नदी बेसिन के अंतर्गत आती हैं, जिनका जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) 2.5 लाख वर्ग किलोमीटर से भी अधिक विस्तृत है।
  • सिक्किम में गंभीर स्थिति: कुल झीलों में से 10% केवल सिक्किम राज्य में स्थित हैं, जिनमें से 25 झीलों को ‘अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक’ श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।

अतीत की भीषण त्रासदी: 2023 की साउथ ल्होनक घटना

भारत पहले भी इस तरह की भीषण तबाही का सामना कर चुका है। 3 अक्टूबर 2023 की मध्यरात्रि को सिक्किम स्थित ‘साउथ ल्होनक झील’ में ग्लेशियल चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 14.7 मिलियन क्यूबिक मीटर) ढह जाने से झील का प्राकृतिक बांध टूट गया था। इस घटना के कारण तीस्ता नदी घाटी में भारी तबाही हुई थी, जिससे जन-धन और बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इनमें से किसी भी अत्यधिक जोखिम वाली झील का प्राकृतिक तटबंध टूटता है, तो निचले मैदानी इलाकों में भारी बाढ़ और तबाही की स्थिति पैदा हो सकती है।

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